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  • February 24, 2022

[20+]paheliyan with answer in hindi-मजेदार पहेलियाँ उत्तर सहित ( 2022)


paheliyan with answer: नाम सुनने में ही इतना अच्छा लगता है लेकिन इस को सुलझाना और भी कठिन होता है तो आज मैं लेकर आया हूँ आप लोगो के लिए Best Paheliyan with answer जिसे आज से पहले आप  लोगो ने नहीं सुनी होंगी और आज देखते है
 

आप का दिमाग कितना तेज चलता है ये Paheliyan In Hindi with answer उन सब भी लोगो के लिए है जो जिसका दिमाग तेज चलता है तो चलते है मेन टॉपिक के ऊपर 

Hello मेरा नाम  (Ab) है और आप सब का मेरे ब्लॉग में दिल से Welcome है और में आप सब लोगों का मेरी ब्लॉग में बहुत बहुत स्वागत है

फ्रेंड जैसे की आप सब को पता है माहौल कैसे चल रहा है रोज कुछ न कुछ सुनने को मिलता है रहता तो आप सब का मंद फ्री करने के लिए हम आप लोगो को लिए लाये है majedar paheliyan in hindi with answer जो आप का दिमाग हिला दे में उम्मीद करता हु आप को पसंद आएंगे 

Paheliyan with answer -paheli in hindi

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paheliyan with answer
 
1. एक  गुफा के दो रखवाले,
दोनों लंबे
दोनों काले
बताओ क्या ?
 
जबाब –

2.दुनिया भर की करता सैर, धरती पर ना रखता पैर ,
दिन मे सोता रात मे जगता , रात अँधेरी मेरे बगैर,
अब बताओ मेरा नाम ?
 
जबाब –

paheliyan with answer

 
3.ऐसा क्या है ?
जिसे हम छू नहीं सकते
पर देख सकते हैं।
 
जबाब –
4.लाल घोडा रुका रहे ,
काला घोडा भागत जाये
बताओ कौन ?
 
जबाब –
5.बीमार नही रहती मैं ,
फिर भी खाती हूँ गोली ,
बच्चे बूढ़े सब डर जाते ,
सुन कर इसकी बोली
बताओ क्या ? 
 
जबाब –
6.काला घोडा
सफ़ेद सवारी
एक उतरे तो दूसरे की बारी ?
 
जबाब –
7.अगर नाक पे चढ़ जाऊ ,
कान पकड़ के तुम्हे पढ़ाउ
बताओ क्या ?
 
जबाब –
8.एक दिन ,एक वकील और उसके बेटे का एक्सीडेंट हो गया उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया
ऑपरेशन रूम में डॉक्टर ने लड़के को देख  के कहा की ये  मेरा बेटा है ।
बताओ डॉक्टर ने उस लड़के को अपना बेटा क्यों कहा ?
 
जबाब –
9.खरीदने पर काला
जलाने पे लाल
फेंकने पे सफ़ेद
बताओ क्या है ?
 
जबाब –
10.एक राजा की अनोखी रानी
दुम के सहारे पीती पानी
बताओ जरा ?
 
जबाब –
11.एक पिता ने अपने बच्चे को गिफ्ट देते हुए कहा
इसमें ऐसी चीज़ है की जब तुम्हे प्यास लगे तो पी लेना
जब भूख लगे तो खा लेना
और जब सर्दी लगे तो जला लेना
बताओ गिफ्ट में क्या दिया ?
 
जबाब –
12.एक फूल काले रंग का
सर पर हमेशा सुहाये
तेज धूप में खिल-खिल जाये
पर छाया में मुरझाये ?
 
जबाब –
13.बूझो भैया एक पहेली
जब काटो नयी नवेली ?
 
जबाब –
14.बनाने वाला उसका उपयोग नही करता ,
उपयोग करने वाला उसे देखता नही,
देखने वाला उसे पसंद नही करता
जवाब जरूर देना है
 
जबाब –
15.पढ़ने में लिखने में दोनों में ही मैं आता काम
पेन नहीं कागज नहीं बूझो मेरा नाम ? 
 
 
जबाब –
16.एक गुफा और बतीस  चोर ,
बतीस रहते है तीन और ,
बारह घंटे  करते है काम,
बाकी वक्त करे काम | 
 
जबाब –
17.शक्तिशाली संसार मे
करूं मनुष्य के काम  |
जल पीते ही तुरन्त,
जाऊ में फिर सुरधाम? 
 
जबाब –
18.सीधी होकर, नीर पिलाती
उलटी होकर दीन कहलाती?
 
जबाब –
19.8 को लिखो 8 बार उत्तर आये 1000 
 
जबाब –
20.हरे रंग की टोपी मेरी हरे रंग की दुशाला
जब पक जाती हू मैं तो
हरे रंग की टोपी पर लाल रंग की दुशाला
मेरे पेट में रहती मोतियो की माला
नाम जरा बताओ मेरा लाला ? 
 
जबाब –
30.ऐसी कौन सी चीज है जिसे जितना खींचो
उतनी ही कम होती जाती है?
 
जबाब –

dimagi paheliyan with answer


31.जितनी ज्यादा सेवा करता,उतना घटता जाता हूँ ।
सभी रंग का नीला पीला ,पानी के संग भाता हूँ ।
बताओ क्या ? 
 
जबाब –
32.एक थाल मोतियों से भरा,सबके सिर पर उल्टा धरा ।
चारो ओर फिरे वो थाल ,मोती उससे एक ना गिरे ? 
 
जबाब –
33.कटोरी पे कटोरा बेटा बाप से गोरा ? 
 
जबाब –
34.एक पहेली सदा नवेली,जो बूझे सो ज़िंदा ।
जिन्दा में से मुर्दा निकले ,मुर्दे में से ज़िंदा ।  
 
जबाब –
35.छोटी सी  छोकरी ,लालबाई है नाम
पहने है घाघरा ,एक पैसा है दाम  
 
जबाब –
36.हरा चोर लाल मकान उसमें बैठा काला शैतान 
 
जबाब –
37.वह कौन सी चीज है जो धूप में नहीं सूख सकती ?
 
जबाब –
38.छोटे से मियाँ जी दाढ़ी सौ गज की 
 
जबाब –
39.साँपों से भरी एक पिटारी, सब के मुँह में एक चिंगारी।
जोड़ो हाथ तो निकले घर से , फिर घर पे सिर पटक दे।।
 
जबाब –
40.सावन भादों खूब चलत है माघ पूस में थोरी,
अमीर खुसरो यूँ कहें तू बूझ पहेली मोरी। 
 
जबाब –
41.भीतर चिलमन बाहर चिलमन , बीच कलेजा धड़के।
अमीर ख़ुसरो यूँ कहे वह दो दो उंगल सरके।।
 
जबाब –
42.एक कहानी मैं कहूँ , सुनले मेरे पूत।
बिन परों के उड़ जाये , वो बांध गले में सूत।।
 
जबाब –
43.हाल-चाल यदि पूछो उससे , नहीं करेगा बात।
सीधा सादा लगता है , पर पेट में रखता दांत।।
 
जबाब –
44.गोल हूँ पर गेंद नहीं , लाल हूँ पर सेब नहीं।
जो भी मुझको खाते , मेरी गंध सदा फैलाते। 
 
जबाब –
45.कभी बड़ा कभी हो छोटा , माह में एक दिन मारे गोता। 
 
जबाब –
46.एक बार आता जीवन में , नहीं दुबारा आता ।
जो मुझको पहचान न पाता ,आजीवन पछताता ॥ 
 
जबाब –
47.कल बनूं धड़ के बिना , मल बनूं सिर हीन ।
पैर कटे तो थोड़ा रहूँ , अक्षर हैं कुल तीन ।। 
 
जबाब –
hindi mein paheliyan

48.खाली पेट बड़ी मस्तानी ।
लोग कहें पानी की रानी ।। 
 
जबाब –
49.आना जाना उसको भाये ।
जिस घर जाये , टुकड़े कर आये । । 
 
जबाब –
50.एक टेबल पर प्लेट में दो सेब हैं , और उसे खाने वाले तीन आदमी….
   बताओ कैसे खायेंगे ?  
 
जबाब –
51.एक लड़की कार से जा रही थी।  एक लड़के ने उससे लिफ्ट मांगी ,आगे जाकर लड़का उतरने लगा तो उसने लड़की का नाम पूछा ?
        लड़की ने कहा  जो मेरी कार का नंबर उसी में मेरा नाम है ।  कार का नंबर था WV733N तो बताओ लड़की का नाम क्या था ?
 
जबाब –
51.एक आदमी ने एक ऊँगली से छह लोगों को छह सेकंड में ऊपर पहुँचा दिया ।
वो न तो स्पाइडर मैन था और न ही सुपर मैन ।। तो बताओ वो कौन था ?
 
 
जबाब –
52.सारे तन में छेद कई हैं  , इन छेदों का भेद यही है।
ये ना हो तो मैं बेकार , इनसे ही मेरा संसार , तभी मैं लाऊ सुरों की बहार । ।   
 
जबाब –
53.नाम का बड़ा हूँ , मगर मैं छोटा ।
पर इस बात पे कभी ना रोता ।।
मेरे आगे गले ना किसी की दाल ।
मेरे बिना लगे दाल भी बेहाल । ।
उलझा हुआ लगा , क्या ये सवाल ?
 
जबाब –
54.तीन अक्षर का उसका नाम , आता है जो खाने के काम ।
अंत कटे तो हल बन जाये , मध्य कटे तो हवा बन जाये ।
बोलो जरा उसका नाम ?
 
जबाब –
55.हरा हूँ पर पत्ता नहीं , नकलची हूँ पर बन्दर नहीं ।
बूझो तो मेरा नाम सही ?
 
जबाब –
56.मारे से वो जी उठे बिन मारे मर जाये ।
बोलो जरा उसका नाम तो मजा मुझे आये ?
 
जबाब –
57.एक नार का सस्ता रेट , लंबी गर्दन मोटा पेट ।
पहले अपना पेट भरे , फिर सबको शीतल करे । । 
 
जबाब –
58.तीन अक्षर का मेरा नाम
प्रथम कटे तो शस्त्र बनू
अंत कटे तो ज्वाला ,
मध्य कटे तो बनू मैं आन,
बोलो क्या हैं मेरा नाम ?
 
जबाब –
59.ऐसा एक अजब खजाना,
जिसका मालिक बड़ा स्याना,
दोनों हाथों से लुटाता,
फिर भी दौलत बढती जाये !!
बताओ  क्या ?
 
जबाब –
60.हरा आटा लाल पराठा ,मिल-जुल कर सखियो ने बांटा  
 
जबाब –
61.पूंछ कटे  सीता ,सिर कटे तो मित्र ।
मध्य कटे तो खोपड़ी ,पहेली बड़ी विचित्र ।  
 
जबाब –
62.काँटों से निकले ,फूलों मे उलझे
नाम बतलाओ ,समस्या सुलझे  
 
जबाब –
63.वो कौन सी भारतीय नारी है ,जो सबसे पहले हवाई रास्ते से भारत से बाहर गयी  
 
जबाब –
64.घूस घुमेला लहँगा पहिने, एक पाँव से रहे खडी।
आठ हाथ हैं उस नारी के, सूरत उसकी लगे परी।
सब कोई उसकी चाह करे, मुसलमान, हिंदू छतरी।
खुसरो ने यही कही पहेली, दिल में अपने सोच जरी। 
 
जबाब –
65.आदि कटे से सबको पारे। मध्य कटे से सबको मारे।
अन्त कटे से सबको मीठा। खुसरो वाको ऑंखो दीठा॥ 
 
जबाब –
66.एक नार ने अचरज किया। साँप मार पिंजरे में दिया।
ज्यों-ज्यों साँप ताल को खाए। सूखै ताल साँप मरि जाए॥ 
 
जबाब –
67.एक नार कुँए में रहे,
 वाका नीर खेत में बहे।
 जो कोई वाके नीर को चाखे,
 फिर जीवन की आस न राखे।।  
 
जबाब –
68.एक जानवर रंग रंगीला,
 बिना मारे वह रोवे।
 उस के सिर पर तीन तिलाके,
 बिन बताए सोवे।। 
 
जबाब –
69.काली है पर काग नहीं,
लम्बी है पर  नाग नहीं।
बल खाती है ढोर नहीं,
बांधते है पर डोर नहीं। 
 
जबाब –
70.काले वन की रानी है,
लाल -पानी पीती है। 
 
जबाब –
71.अपनों के ही घर ये जाये,
तीन अक्षर का नाम बताये।
शुरू के दो अति हो जाये,
अंतिम दो से तिथि बताये। 
 
जबाब –
72.एक पहेली मैं बुझाऊँ,
सिर को काट नमक छिड़काउ। 
 
जबाब –
73.खाते नहीं चबाते लोग ,
काठ में कड़वा रस संयोग ।
दांत जीभ की करे सफाई
बोलो बात समझ में  आई।
 
जबाब –
74.चार ड्राइवर एक सवारी ,
उसके पीछे जनता भारी। 
 
जबाब –
75.ऊँट की बैठक, हिरण की चाल ,
बोलो वह कौन है पहलवान। 
 
जबाब –
76.काला मुँह लाल शरीर ,
कागज को वह खाता
रोज शाम को पेट फाड़कर
कोई उन्हें ले जाता। 
 
जबाब –
77.कल बनता धड़ के बिना ,
मल बनता सिरहीन।
थोड़ा हूँ पैर कटे तो ,
अक्षर केवल तीन। 
 
जबाब –
78.पानी से निकला दरख्त एक
पात नहीं पर डाल अनेक।
एक दरख्त की ठण्डी छाया ,
नीचे एक बैठ न पाया। 
 
जबाब –
 79.हमने देखा अजब एक बन्दा ,
सूरज के सामने रहता ठण्डा।
धूप में जरा नहीं घबराता ,
सूरज की तरफ मुँह लटक जाता। 
 
जबाब –
80.सदा ही चलती रहती हूँ,फिर भी नहीं थकती हूँ ।
जिसने मुझसे किया मुकाबला , उसका ही कर दिया तबादला ।   
 
जबाब –
81.लोहे को खींचू इतनी ताकत मुझमे .
पर रबड़ मुझे हरा देता,
गुम हुई सुई को मैं पा लेता ,
मेरा खेल निराला ,
कोई तो मेरा नाम बूझो ? 
 
जबाब –
82.एक नारी के है दो बालक,
दोनो एक ही रंग,
पहला चले दूसरा सोवे,
फिर भी दोनों संग ॥ 
 
जबाब –
83.सिर काटो तो तोला जाऊँ
पैर कटे इक वृक्ष कहलाऊ
कमर कटे तो जंगल जानो
जरा मुझे तो तुम पहचानो ॥ 
 
 
जबाब –
84.चार अंगुल का पेड़,
सवा मन का पत्ता,
फल लगे अलग -अलग,
पक जाये इकट्ठा ॥ 
 
जबाब –
85.एक गुनी ने ये गुन कीना
हरियल पिंजरे में दे दीना
देखो जादूगर का कमाल
डाला हरा निकाला लाल  
 
जबाब –
86.भीतर चिलमन ,बाहर  चिलमन,बीच कलेजा धड़के
अमीर खुसरो यूँ कहे वो दो-दो उँगल सरके  
 
जबाब –
87.उज्जल अत्तीत मोती बरनी ,पायी कबन्त दिए मोय धरनी
जहाँ धरी वहाँ नहीं पायी ,हाट बाजार सभय ढूँढ आयी
ए सखी अब कीजै का ?पीय मांगे तो दीजै क्या ? 
 
जबाब –
88.अपने समय में एक नर आये
टूक देखाय और फिर छुप जाये
मोहे अचम्भा आवत ऐसे
जल में अग्नि (आग) बसत हाय कैसे  
 
जबाब –
89.एक पुरुष हाय सुन्दर मूरत ,जो देखे वो उसी की सूरत ,
फ़िक्र पहेली पायी ना ,बूझन लगा आयी ना  
 
जबाब –
90.बनी रंगीली शर्म की बात ,बे मौसम आयी बरसात
यही अचम्भा मुझ को आये ,ख़ुशी के दिन क्यों रोती जाये  
 
जबाब –
91.एक नारी में जब नर जाये ,काला मुँह कर उल्टा आये ।
छाती घाव अपनी सहाय ,मन का बचन पर आये कहाय । ।  
 
जबाब –
92.नर नारी कहलाती है ,और बिन वर्षा जल जाती है ।
पूरख से अवे पूरख में जाइ
ना दी किसी ने बूझ बताई  
 
जबाब –
93.एक नारी के सिर पर है नार
पिय की लगन में खड़ी लाचार
शीश चुवे और चलय न जोर
रो रो कर वो करय है भोर  
 
जबाब –
94.पवन चलत वे देहे बढ़वाए
जल पीवत वे जीव गंवाए
है वे पियारी सुन्दर नारि
नारि नहीं पर है वे नारि  
 
जबाब –
95.बाल था जब सब को भाया ,बड़ा हुआ कछु काम ना आया ।
खुसरो कह दिया उसका नाव (नाम),अर्थ करो नहि छाडो गाँव । ।  
 
जबाब –
96.बीसों का सिर काट लिया ,
ना मारा ना खून किया  
 
जबाब –
97.तीन अक्षर का मेरा नाम, पहला कटे तो राम राम
दूसरा कटे तो फल का नाम ,तीसरा कटे तो काटने का काम  
 
जबाब –
98. काला हण्डा , उजला भात ,
ले लो भाई हाथों -हाथ। 
 
जबाब –
99.हाथी, घोड़ा ऊँट नहीं ,
खाए न दाना ,घास।
सदा ही धरती पर चले ,
होए न कभी उदास। 
 
जबाब –
100.मैं हरी , मेरे बच्चे काले ,
मुझको छोड़ , मेरे बच्चे खाले। 
 
जबाब –

101.चार हैं रानियाँ और एक हैं राजा ,
हर एक काम में उनका अपना साझा। 
 
जबाब –
102.तीन अक्षरों का मेरा नाम ,
आदि कटे तो चार।
कैसे हो तुम मैं जानूँ ,
बोलो तुम सोच-विचार। 
 
जबाब –
103.सापों से भरी एक पिटारी ,
सब के मुँह में दी चिंगारी।
जोड़ो हाथ तो निकल घर से ,
फिर घर पर सिर दे पटके। 
 
जबाब –
 104.हाथ-पैर सब जुदा-जुदा ,
ऐसी सूरत दे खुदा।
जब वह मूरत बन ठन आवे ,
हाथ धरे तो राग सुनाए। 
 
जबाब –
105.ऐसा शब्द बताये  जिससे ,
फूल , मिठाई , फल बन जाए। 
 
जबाब –
106.एक छोटा-सा बंदर ,
जो उछले पानी के अंदर। 
 
जबाब –
107.थल में पकड़े पैर तुम्हारे ,
जल में पकड़े हाथ।
मुर्दा होकर भी रहता है ,
जिंदो के ही साथ। 
 
जबाब –
108.बच्चे भी कहते है मामा ,
बूढ़े भी कहते है मामा।
दीदी भी कहती है मामा ,
बोलो कोनसे मामा। 
 
जबाब –
109.तीन पैर की तितली ,
नहा-धोकर निकली
 
जबाब –
110.न काशी , न काबाधाम ,
बिन जिसके हो चक्का जाम।
पानी जैसी चीज है वह
झट बताओ उसका नाम। 
 
जबाब –
1शुरू कटे तो नमक बने ,
मध्य कटे तो कान।
अंत कटे तो काना बने ,
जो न जाने उसका बाप शैतान। 
 
जबाब –
शिवजी जटा में गंगा का पानी
जल का साधु , बूझो तो ज्ञानी। 
 
जबाब –
मंदिर में इसे शीश नवायें ,
मगर राह में ठुकराये।
 
जबाब –
 सिर काट दो दिल दिखाता हूँ ,
पैर काट दो आदर बना हूँ
पेट काट दो ,कुछ न बताता
प्रेम से अपना शीश नवाता। 
 
जबाब –
 यदि मुझको उल्टा कर देखो
लगता हूँ मैं नव जवान।
कोई प्रथक नहीं रहता
बूढ़ा , बच्चा या जवान।
 
 
जबाब –
पैर नहीं पर चलती हूँ
कभी न राह बदलती हूँ
नाप-नाप कर चलती हूँ
तो भी न घर से टलती हूँ। 
 
जबाब –
काला हूँ, कलूटा हूँ ,
हलवा पूरी खिलाता हूँ। 
 
जबाब –
 लिखता हूँ पर पैन नहीं ,
चलता हूँ पर गाड़ी नहीं ,
टिक-टिक करता हूँ ,
पर घड़ी नहीं।
 
 
जबाब –
चलने को तो चलता हूँ ,
गर्मी में सुख पहुंचाता हूँ।
पैर भी हैं मेरे तीन ,
मगर आगे बढ़ नहीं पाता हूँ।।
 
जबाब –
धरती में मैं पैर छिपाता ,
आसमान में शीश उठाता।
हिलता पर कभी न चल पाता ,
पैरों से हूँ भोजन खाता ,
क्या नाम है मेरे भ्राता।
 
जबाब –
लाल-लाल आँखे ,लम्बे-लम्बे कान
रुई का फुहासा ,बोलो क्या है उसका नाम ? 
 
जबाब –
रात गली में खड़ा-खड़ा ,
डंडा लेकर बड़ा-बड़ा।
रहो जागते होशियार ,
कहता है वो बार-बार। 
 
जबाब –
घोड़ा दौड़ा पटरी पर ,
फिर उड़ जायेगा ऊपर ,
बादल के प्यारे घर में ,
दूर हवा में अंदर में। 
 
जबाब –
आई गर्मी , आया मैं
बच्चों के मन भाया मैं ,
गुठली चुसो या फेकों ,
लाल सुनहरा आया मैं।
 
जबाब –
डिब्बे पे डिब्बा ,
डिब्बा का गाँव
चलती फिरती बस्ती ,
लोहे के पाँव। 
 
जबाब –
 हरा हूँ पर पत्ता नहीं ,
नकलची हूँ पर बन्दर नहीं ,
बूझो तो मेरा नाम सही। 
 
जबाब –
कद के छोटे कर्म  के हीन ,
बीन-बजाने के शौकीन ? 
 
जबाब –
एक खेत में ऐसा हुआ ,
आधा बगुला आधा सुआ।
 
जबाब –
ऊपर से गिरा बम ,
उसमे हड्डी न दम। 
 
जबाब –
हरा चोर लाल मकान ,
उसमें बैठा काला शैतान ,
गर्मी में वह दीखता ,
सर्दी में गायब हो जाता। 
 
जबाब –
लाल-टेन पंखो में ,
उड़े अंधेरी रात में ,
जलती बाती बिना तेल के ,
जाड़े व बरसात में। 
 
जबाब –
हरी-हरी मछली के
हरे-हरे अण्डे ,
जल्दी दे बूझिए
वरना पड़ेंगे डण्डे। 
 
जबाब –
 आँखे दो हो जाए चार ,
मेरे बिना कोट बेकार ,
घुसा आँखो में मेरा धागा ,
दरजी के घर से मैं भागा। 
 
जबाब –
एक बार एक लड़का अपने दोस्त से कहता है,
कि आज मैंने पांच मच्छर मारे जिसमे
तीन लेडीज थे और दो जेंट्स। बताओ की उसको
कैसे पता चला की कौन सी लेडीज थी और कौन जेंट्स ? 
 
जबाब –
छोटा सा सिपाही,उसकी खींच के पैंट उतारी ।  
 
जबाब –
दो किसान लड़ते जाये, उनकी खेती बढ़ती जाये ।  
 
जबाब –
घर क्यों अँधियारा ?फ़क़ीर क्यों बड़बड़ाया ? 
 
जबाब –
समोसा क्यों ना खाया ?जूता क्यों ना पहना ? 
 
जबाब –
सफ़ेद मुर्गी हरी पूंछ,तुझे न आये तो नानी से पूछ ।  
 
जबाब –
 कभी बड़ा हो कभी हो छोटा ,माह में एक दिन मारे गोता ।  
 
जबाब –
जब ये जलते है तो रोते है ,सब इन्हें जलाकर खुश होते है ।  
 
जबाब –
काली-काली एक चुनरिया,जगमग -जगमग मोती ,
आ सजती धरती के ऊपर ,जब सारी दुनिया सोती ।  
 
जबाब –
पीली पोखर,पीले अंडे । जल्द बता नहीं मारू डंडे ॥  
 
जबाब –
छोटा हूँ पर बड़ा कहलाता ,
रोज दही की नदी में नहाता। 
 
जबाब –
 दूध की कटोरी में काला पत्थर ,
जल्दी से तुम बताओ सोचकर।
 
जबाब –
 चाची के दो कान , चाचा के नहीं कान ,
चाची अति सुजान , चाचा को कुछ न ज्ञान
 
 
जबाब –
 पाँच अक्षर का मेरा नाम ,
उल्टा-सीधा एक समान। 
 
जबाब –
न ही मैं खाता हूँ ,
न ही मैं पीता हूँ ,
फिर भी सबके घरों की ,
मैं रखवाली करता हूँ। 
 
जबाब –
 हरी-हरी पूँछ ,
सफेद घोड़ा ,
बताने में समय ,
मैं लेता बहुत थोड़ा। 
 
जबाब –
 मध्य कटे तो सास बन जाऊँ ,
अंत कटे तो सार समझाऊँ ,
मैं हूँ पंक्षी , रंग सफ़ेद ,
बताओ मेरे नाम का भेद। 
 
जबाब –
तीन अक्षर का मेरा नाम ,
प्रथम कटे तो रहूँ पड़ा ,
मध्य कटे तो हो जाऊँ कड़ा
अंत कटे बनता कप ,
नहीं समझना इसको गप्प। 
 
जबाब –
 मैं अलबेला कारीगर
काटूं काली घास ,
राजा , रंक और सिपाही ,
सिर झुकाते मेरे पास। 
 
जबाब –
सिर पर हूँ पर बाल नहीं ,
बेसन हूँ पर दाल नहीं ,
सरपट में पर चाल नहीं ,
सरगम में पर ताल नहीं ? 
 
जबाब –
सरपट दौड़े हाथ न आये ,
घड़ियाँ उसका नाम बताये। 
 
जबाब –
सरपट दौड़े हाथ न आये ,
घड़ियाँ उसका नाम बताये। 
 
जबाब –
 वह पक्षी नहीं है , पर उड़ सकता है ,
और उल्टा होकर सोता है। 
 
जबाब –
एक गाँव में आग लगी ,
दूसरे गाँव में धुँआ ,
चलो मित्र चलकर देखें ,
उठा भूमि का कुआँ। 
 
जबाब –
 एक मुर्गा आता है ,
चल-चलकर रुक जाता है ,
चाकू लाओ गर्दन काटे ,
फिर चलने लग जाता है।
 
 
जबाब –
 बिना कान के सुनने वाला,
नीचे गोरा ऊपर काला। 
 
जबाब –
सिर पर उसके देखा मटका ,
मटके को घर लाकर पटका ,
कुछ को खाया कुछ को फेंका ,
मटके का पानी भी गटका। 
 
जबाब –
सर के नीचे दबी रहे ,
लेकिन चू तक न करती है ,
बच्चों , बोलो कौन है वो ,
जो साथ तुम्हारे सोती है। 
 
जबाब –
सात गाँठ की रस्सी ,
गाँठ-गाँठ में रस ,
इसका उत्तर जो बताये,
नाकु भैया देंगे रुपए दस। 
 
जबाब –
पत्थर की नाव पर ,
बैठा सवार ,
चलती नहीं नाव ,
पर चलता सवार। 
 
जबाब –
न देखे न बोले ,
फिर भी भेद खोले। 
 
जबाब –
 न कभी आता है ,
न कभी यह जाता है ,
इसके भरोसे जो रहे ,
हमेशा पछताता है।
 
जबाब –
गोल-गोल चेहरा ,
पेट से रिश्ता गहरा। 
 
 
जबाब –
मुझे सुनाती सबकी नानी ,
प्रथम कटे तो होती हानि ,
बच्चे भूलते खाना , पानी ,
एक था राजा , एक थी रानी। 
 
जबाब –
 एक ऐसा फूल बताये ,
जिसमे रंग न खुशबू पाये। 
 
जबाब –
आगे घेरा पीछे घेरा ,
बीच में है चैन-चकेरा ,
गाँव में भी जाती है ,
सबको मंजिल तक पहुँचाती है। 
 
जबाब –
मिट्टी का बनाया मकान ,
लोहे की छत्त लगाई ,
सुबह शाम उस घर में ,
रोजाना आग लगाई। 
 
जबाब –
एक पेड़ की तीस हैं डाली ,
आधी सफेद और आधी काली। 
 
जबाब –
तीन अक्षर का मेरा नाम ,
आता हूँ खाने के काम ,
मध्य कटे तो बन जाऊँ चाल ,
मेरा नाम सदा तत्काल। 
 
जबाब –
पहले थी मैं भोली-भाली ,
तब सहती थी मार ,
अब पहनी मैंने लाल चुनरियाँ ,
अब न सहूँगी मार। 
 
जबाब –
 पेट में अंगुली सिर पर पत्थर ,
जल्दी से बताओ उसका उत्तर।
 
जबाब –
जीभ नहीं , पर फिर भी बोले ,
बिना पाँव सारा जग डोले
राजा , रंक सभी को भाता ,
जब आता तब खुशियाँ लाता। 
 
जबाब –
छोटे से हैं मटकूदास ,
कपड़ा पहने सौ पचास। 
 
जबाब –
सुख-दुख की जीवन साथी
पग-पग साथ निभाती हूँ।
क्षण भर भी मैं जुदा न होती
हाँ , बड़ी , छोटी बन जाती हूँ। 
 
 
जबाब –
आग भरे गुड़गूडीया दास ,
पेट में जिनके पानी ,
पूंछ लगाकर उसकी मुँह में ,
उगले धुआँ रमजानी। 
 
जबाब –
एक पेड़ कश्मीरा
कुछ लोग फरे ,
कुछ जीरा , कुछ ककड़ी
कुछ खीरा। 
 
जबाब –
चार खड़े , चार पड़े
बीच में ताने बाने
पसरे हैं लम्बोदर लाला
लम्बी चादर ताने।  
 
जबाब –
पत्थर पर पत्थर
पत्थर पर पैसा
बिना पानी के घर बनावे
वह कारीगर कैसा?  
 
जबाब –
बीच ताल में
बसे तिवारी
बे कुंजी की
लगी किवाड़ी। 
 
जबाब –
काली नदी सुहावनी ,
पीले अण्डे दे ,
जो आये आदमी ,
सभी समेट ले जाए। 
 
जबाब –
 बिन धोए सब खाते है ,
खाकर ही पछताते हैं ,
बोलो ऐसी चीज है क्या ,
कहते समय शरमाते है 
 
जबाब –
खुशबु है पर फूल नहीं ,
जलती है पर ईर्षा (जलन) नहीं। 
 
 
जबाब –
धक-धक मैं हूँ करती ,
फक-फक धुँआ फेंकती ,
बच्चे बूढ़े मुझ पर चढ़ते ,
निशानों पर मैं दौड़ती। 
 
जबाब –
 खड़ा द्वार पर ऐसा घोडा ,
जिसने चाहा पेट मरोड़ा। 
 
जबाब –
छोटा-सा काला घर ,
पर चलता है , इधर-उधर। 
 
जबाब –
जाने कहाँ किधर से आता ,
फिर न जाने क्यों छिपकर  जाता।
आसमान में पड़े दिखाई
सात रंग में रखता नाता। 
 
जबाब –
कट-कट गया हुआ हल ,
सब्जी खाएंगे उसे हम कल।
 
जबाब –
लाल गाय लकड़ी खाय ,
पानी पिये मर जाये। 
 
जबाब –
ये धनुष है सबको भाता ,
मगर लड़ने के काम न आता। 
 
जबाब –
जरा-सी बिटिया
गजभर की चुटिया। 
 
जबाब –
बारह घोड़े , 30 गाड़ी ,
365 करें सवारी। 
 
जबाब –
 एक हाथ का प्राणी अचल ,
हाथ हिलाओ निकले जल।
 
जबाब –
 अजब सुनी इक बात ,
नीचे फल और ऊपर पात। 
 
जबाब –
 लकड़ी के घोड़े को
लोहे की लगाम। 
 
जबाब –
 जिसके आगे जी , जिसके पीछे जी
नहीं बताओगे तो पड़ेंगे डंडेजी।
 
जबाब –
रात में है , पर दिन में नहीं ,
चतुर में है , पर चालाक में नहीं ,
स्वर में है पर व्यजंन में नहीं।
 
जबाब –
एक गोड़ , दो बाहिया
मोड़ ससुर के हैया। 
 
जबाब –
 चढ़ चौकी पर बैठे रानी
सर पर आग बदन पर पानी
बार-बार सर काटे जाका
कोई नाम बतावे वाका। 
 
जबाब –
 है पानी का मेरा चोला
हूँ सफेद आलू-सा गोला।
कहीं उलट यदि मुझको पाओ ,
लाओ-लाओ कहते जाओ।
 
जबाब –
जादू के डंडे का देखो ,
बिन तेल बिन बाती
नाभि(ढोढ़ी) दबाते तुरन्त रोशनी ,
सभी ओर फैलाती। 
 
जबाब –
सिर पर कलगी पर मैं न चन्दा
गरजे बादल , नीचे बन्दा। 
 
जबाब –
हवालात में बन्द पड़ी हूँ ,
फिर भी बाहर पाओगे।
बिना पैर के सैर करुँ मैं
बिन मेरे मर जाओगे। 
 
जबाब –
एक पहेली मैं कहूँ
तू सुन ले मेरे मित्र
बिन पंखों के उड़ गयी
वह बाँध गले में सूत। 
 
जबाब –
काला है पर कौआ नहीं ,
बेढब है पर हौवा नहीं ,
करे नाक से सारा काम ,
अब बतलाओ उसका नाम ?
 
जबाब –
 हाथ , पैर नहीं जिसके
न कहीं आता-जाता
फिर भी सारी दुनिया की
खबरें हमें सुनाता। 
 
जबाब –
खुदा की खेती का देख यह हाल ,
ना कोई पत्ता ना कोई डाल
ना बीज डाला ना जोता हल
नहीं लगता उसमे कोई फल
पर जब काटे उसको भाई
होती पहले से दूनी सवाई। 
 
जबाब –
जंगल में मायका , गाँव में ससुराल ,
गाँव आई दुल्हन उठ चला बवाल।
 
जबाब –
 ऐसा क्या है ?
जिसे हम छू नहीं सकते
पर देख सकते हैं। 
 
जबाब –
पास में उड़ता-उड़ता आए ,
क्षण भर देखू फिर छिप जाए।
बिन आग के जलता जाए ,
सबके मन को वह लुभाए। 

 

जबाब –